शिमला। हिमाचल प्रदेश ने विकास के नए आयाम छू लिए हैं। राज्य की प्रति व्यक्ति आय अब राष्ट्रीय औसत से भी अधिक पहुंच गई है। ताजा आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, सोलन जिला प्रदेश का सबसे अमीर जिला बनकर उभरा है, जबकि राजधानी शिमला पांचवें स्थान पर है। ये आंकड़े प्रदेश की मजबूत आर्थिक स्थिति और संतुलित विकास का संकेत देते हैं।
हिमाचल की प्रति व्यक्ति आय देश से भी अधिक है। वर्ष 2024-25 में हिमाचल की प्रति व्यक्ति आय 2,57, 512 रुपए दर्ज की गई। ये पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 9।6 फीसदी अधिक है। वहीं, देश की प्रति व्यक्ति आय (पीसीआई यानी पर कैपिटा इनकम) 2,34,859 रुपए है।
हिमाचल की प्रति व्यक्ति आय का ये उल्लेखनीय आंकड़ा बागवानी, निर्माण यानी कंस्ट्रक्शन, सर्विस सेक्टर जैसे पर्यटन आदि के कारण है। हिमाचल में भी सोलन जिला प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से राज्य में टॉप पर है। इसका कारण उद्योग के साथ-साथ टमाटर व मशरूम उत्पादन भी है। शिमला जिला का स्थान पांचवां है। वहीं, कांगड़ा जिला प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से अंतिम पायदान पर है। इसका एक कारण कांगड़ा की आबादी भी है।
उल्लेखनीय है कि प्रति व्यक्ति आय के विभिन्न कारक होते हैं। उनमें जनसंख्या घनत्व, उद्योग के स्तर, पर्यटकों की आमद के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच शामिल है। यूनाइटेड नेशंज डेवलपमेंट प्रोग्राम की ह्यूमन डेवलपमेंट रिपोर्ट-2025 में ये आंकड़े सामने आए हैं।
हिमाचल सरकार के पूर्व वित्त सचिव केआर भारती के अनुसार, ‘हिमाचल की प्रति व्यक्ति आय का बेहतरीन आंकड़ा होने के कई कारण है। यहां जनसंख्या कम है। पर्यटन सेक्टर जीडीपी में अच्छा योगदान देता है। बागवानी व बेमौसमी सब्जियों के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलता है। सोलन में उद्योग धंधे के साथ ही खेती-किसानी में टमाटर, अदरक, मशरूम पैदावार से समृद्धि आई है। हिमाचल में सरकारी नौकरियों में भी लोग हैं और सेना में भी सेवाएं देने वालों की संख्या उल्लेखनीय है। हिमाचल में यदि पर्यटन सेक्टर को और संवारा जाए तो प्रति व्यक्ति आय का आंकड़ा और भी बेहतर हो सकता है’।
जानिए, कौन सा जिला किस स्थान पर
जिलेवार प्रति व्यक्ति आय का आंकड़ा वर्ष 2022-23 का है। इन आंकड़ों पर नजर डालें तो सोलन जिला सबसे आगे है। इसका कारण उद्योग हैं। सोलन जिला में ही बीबीएन यानी बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ इंडस्ट्रियल एरिया है। इसके अलावा परवाणू भी प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। दिलचस्प बात ये है कि सोलन के साथ ही इस सूची में लाहौल व किन्नौर जिलों का नाम है। इनकी समृद्धि का प्रमुख कारण कम जनसंख्या घनत्व होना है। सोलन जिला की प्रति व्यक्ति आय वित्त वर्ष 2022-23 में 8 लाख रुपए प्रति व्यक्ति आंकी गई।
सोलन के बाद लाहौल-स्पीति का नंबर
सोलन के बाद लाहौल-स्पीति का नंबर है। लाहौल-स्पीति जिला की प्रति व्यक्ति आय तीन लाख रुपए के करीब है। इसी प्रकार सिरमौर जिला की प्रति व्यक्ति आय ढाई लाख रुपए से कुछ अधिक है। हालांकि, सिरमौर दुर्गम जिला की श्रेणी में आता है, लेकिन यहां की समृद्धि का कारण इसका हरियाणा के साथ संपर्क व उद्योग आदि हैं। किन्नौर का आंकड़ा भी सिरमौर जिला के करीब ही है।
लिस्ट में शिमला पांचवें नंबर पर, सबसे अंत में कांगड़ा
पांचवें नंबर पर शिमला जिला है, जहां का आंकड़ा दो लाख रुपए के करीब है। फिर कुल्लू, ऊना, बिलासपुर, चंबा, मंडी, हमीरपुर व कांगड़ा का स्थान है। यहां प्रति व्यक्ति आय कम होने का कारण अधिक जनसंख्या व उद्योगों की कमी है। कुल्लू से लेकर कांगड़ा तक लिस्ट में इन जिलों की प्रति व्यक्ति आय का आंकड़ा दो लाख रुपए से कम है। लिस्ट में कांगड़ा सबसे अंत में है और यहां की प्रति व्यक्ति आय एक लाख रुपए से कुछ ही अधिक है।
2011-12 से ही हिमाचल देश से आगे
प्रति व्यक्ति आय को लेकर हिमाचल व देश का तुलनात्मक अध्ययन करें तो हिमाचल प्रदेश 2011-12 से ही देश से आगे है। राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2011-12 में प्रति व्यक्ति आय पचास हजार रुपए से कुछ अधिक थी। तब हिमाचल का आंकड़ा एक लाख रुपए के करीब पहुंचने वाला था। हिमाचल ने 2021-13 में एक लाख रुपए का आंकड़ा छू लिया था। राष्ट्रीय स्तर पर इस आंकड़े को छूने में 2015-16 तक का समय लगा।