हिमाचल दस्तक, डेस्क । बारिश हुई नहीं कि मौसम विभाग बोल पड़ता है- ‘हिमाचल में 45 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई या प्रदेश में भारी वर्षा की चेतावनी, 100 मिमी तक बारिश हो सकती है’। आम लोग इसे सुनते तो जरूर हैं, लेकिन अक्सर समझ नहीं पाते कि ये मिलीमीटर में बारिश… का क्या मतलब होता है? और आखिर इसे मापा कैसे जाता है?
अब सवाल यह है कि बारिश को मिलीमीटर (mm) में ही क्यों मापा जाता है, लीटर या इंच में क्यों नहीं?
1 मिमी बारिश = 1 लीटर प्रति वर्ग मीटर पानी
जानकार बताते हैं कि बारिश को मिलीमीटर में मापने का सीधा अर्थ होता है कि यदि किसी समतल सतह पर बारिश का पानी जमा किया जाए, तो वह सतह 1 मिलीमीटर गहराई तक भर गई हो । यानी, 1 मिमी बारिश का मतलब होता है- 1 वर्ग मीटर सतह पर 1 लीटर पानी ।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी घर की छत का क्षेत्रफल 100 वर्ग मीटर है और 10 मिमी बारिश होती है, तो उस छत पर कुल 1,000 लीटर पानी बरसता है। इस गणना से यह समझा जा सकता है कि सिर्फ कुछ मिमी बारिश भी कितनी भारी मात्रा में पानी ला सकती है।
क्या है मापने की तकनीक ?
बारिश को मापने के लिए रेनगेज नामक यंत्र का प्रयोग किया जाता है। यह एक बेलनाकार पात्र होता है जिसमें ऊपर से गिरने वाला पानी जमा होता है और स्केल से मापा जाता है कि कितने मिलीमीटर पानी गिरा ।
भारत में बारिश की माप और पूर्वानुमान का कार्य भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा किया जाता है। IMD की विभिन्न जगहों पर स्थापित मौसम वेधशालाएं बारिश का रियल टाइम डेटा रिकॉर्ड करती हैं।
मिलीमीटर क्यों, लीटर या इंच क्यों नहीं?
मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि मिलीमीटर में मापना अंतरराष्ट्रीय मानक है। यह गहराई बताता है, जिससे दुनिया भर में वर्षा की सटीक तुलना की जा सकती है। वहीं लीटर में मापना क्षेत्रफल पर निर्भर होता है, और इंच मापन प्रणाली अधिकतर देशों में प्रचलन में नहीं है।
आम जनता को समझना होगा इसका महत्व
जल संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोग मिमी में वर्षा की गणना को समझें, तो वे बारिश के पानी को संचय करने की दिशा में गंभीर हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए, 20 मिमी की एक सामान्य बारिश भी एक 200 वर्ग मीटर की छत पर 4,000 लीटर पानी दे सकती है, जिसे रेन वाटर हार्वेस्टिंग के ज़रिए उपयोग में लाया जा सकता है।
एक नजर में:
1 मिमी बारिश = 1 लीटर प्रति वर्ग मीटर पानी
100 मिमी बारिश = 10,000 लीटर प्रति 100 m2 सतह
मापन यंत्र = रेनगेज
भारत में जिम्मेदार एजेंसी = IMD
मिलीमीटर = अंतरराष्ट्रीय मानक इकाई
अलर्ट कैसे जारी करता है मौसम विभाग?
मौसम विभाग सिर्फ बारिश मापने तक सीमित नहीं है, बल्कि अलर्ट जारी करना भी उसका अहम काम है। मौमस विभाग येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी करता है। मौसम विभाग अलर्ट जारी कैसे करता है इस पर मौसम विभाग के वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने कहा कि अगर 24 घंटे में 64 मिमी से ज्यादा बारिश की संभावना है, तो हेवी रेनफॉल अलर्ट जारी किया जाता है। अगर यह आंकड़ा 120 मिमी से 200 मिमी के बीच है, तो वेरी हेवी रेनफॉल (ऑरेंज अलर्ट) माना जाता है और इससे ज्यादा बारिश की संभावना हो तो रेड अलर्ट जारी किया जाता है।
इसलिए अगली बार जब कोई कहे कि आज 50 मिमी बारिश हुई तो समझ जाइए-ये सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि हजारों लीटर पानी की कहानी है।