सुक्खू सरकार का वित्तीय अनुशासन की ओर बड़ा कदम; खाना, रहना सब हुआ महंगा
शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने मितव्ययता और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के पदाधिकारियों को दी जा रही विभिन्न विशेष सुविधाओं और रियायतों पर रोक लगा दी है। सरकार के इस फैसले का असर निगम के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रबंध निदेशक तथा निदेशक मंडल के सरकारी एवं गैर-सरकारी निदेशकों पर पड़ेगा।

सरकार की मंजूरी मिलने के बाद यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसके तहत एचपीटीडीसी के होटलों में पदाधिकारियों को मिलने वाली मुफ्त एवं रियायती आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं समाप्त कर दी गई हैं। हालांकि निगम के कर्मचारियों को पूर्ववत निर्धारित रियायतें मिलती रहेंगी। अब तक निगम के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक को पर्यटन निगम के होटलों में ठहरने के लिए केवल 100 रुपये प्रतिदिन का शुल्क देना पड़ता था, जबकि भोजन पर 50 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जाती थी। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें यही सुविधाएं उपलब्ध रहती थीं। नए आदेशों के तहत इन सभी रियायतों को समाप्त कर दिया गया है।
इसी प्रकार निगम के निदेशक मंडल के सरकारी और गैर-सरकारी निदेशकों को बैठकों में भाग लेने के दौरान निगम के होटलों में नि:शुल्क आवास और भोजन की सुविधा मिलती थी। इसके अतिरिक्त उन्हें जीवनभर के लिए आवास और भोजन पर 30 प्रतिशत तक की छूट का लाभ भी प्राप्त था। सरकार ने इस व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया है।
विवाह अवसर की रियायतें भी समाप्त
सरकार ने प्रबंध निदेशक के पुत्र या पुत्री के विवाह अवसर पर दी जाने वाली विशेष रियायतों को भी खत्म कर दिया है। पहले इस अवसर पर आवास पर 50 प्रतिशत, भोजन पर 40 प्रतिशत और परिवहन सेवाओं पर 20 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जाती थी।
निगम की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाने में मिलेगी मदद
सरकार का मानना है कि इन विशेष सुविधाओं को समाप्त करने से पर्यटन विकास निगम के अनावश्यक व्यय में कमी आएगी तथा निगम की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक संसाधनों के अधिक प्रभावी एवं न्यायसंगत उपयोग को सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








