शिमला। बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ (बीबीएन) औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगों से निकलने वाले जहरीले रसायनों ने भूजल को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। आईआईटी मंडी और संयुक्त समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यहां का भूजल भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के पेयजल मानकों के अनुरूप नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार भूजल में मैग्नीशियम, कोबाल्ट, बेरियम, लैड और यहां तक कि यूरेनियम की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है।
हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश, गंभीर तथ्य उजागर
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में भूजल प्रदूषण को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आईआईटी मंडी और संयुक्त समिति की ओर से रिपोर्ट पेश की गई। आईआईटी मंडी ने 17 मार्च 2025 को दाखिल स्थिति रिपोर्ट में सतही और भूजल नमूनों के संग्रह स्थलों का ब्यौरा दिया। संयुक्त समिति ने 17 जुलाई 2025 को दाखिल तीसरी प्रगति रिपोर्ट में अदालत को बताया कि कुल 75 स्थानों पर बीआईएस मानकों का उल्लंघन पाया गया।
अलग-अलग एजेंसियों की रिपोर्ट में विरोधाभास
रिपोर्टों की समीक्षा में यह भी सामने आया कि केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) और हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसपीसीबी) के परीक्षण परिणामों में फर्क है। उदाहरण के लिए, महादेव क्षेत्र में सीजीडब्ल्यूबी ने मैग्नीशियम की मात्रा सीमा से अधिक पाई, जबकि एचपीएसपीसीबी की रिपोर्ट में यह पैरामीटर दर्ज ही नहीं हुआ।
आईआईटी मंडी की रिपोर्ट के अनुसार 21 स्थानों पर मैंगनीज, निकल, कॉपर, क्रोमियम, जिंक, आयरन, कोबाल्ट, सेलेनियम और आर्सेनिक जैसे तत्व निर्धारित मानकों से अधिक पाए गए, जबकि सरकारी एजेंसियों की रिपोर्ट इन्हें सुरक्षित सीमा के भीतर बताती है।
निगरानी और अगली कार्यवाही
रिपोर्ट में यह भी माना गया कि टोटल ऑर्गेनिक कार्बन (टीओसी) की जांच सुविधाओं की कमी के कारण नहीं हो सकी। अब अगली निगरानी के दौरान अगस्त में टीओसी के नमूने जांचने की योजना है। समिति ने आगे की मॉनिटरिंग के बाद एक और रिपोर्ट दाखिल करने का आग्रह किया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। अब इस मामले की सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी।