नेपाल के बाद अब फ्रांस में भी सरकार के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। बजट में कटौती के खिलाफ और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस्तीफे की मांग को लेकर 1 लाख से ज्यादा लोग बुधवार को सड़क पर आ गए। फ्रांस के गृह मंत्री ने राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की पुष्टि की है। गृह मंत्री के अनुसार सैंकड़ों गिरफ्तारियां भी की गईं हैं। बता दें कि फ्रांस में नए प्रधानमंत्री बुधवार को पदभार ग्रहण करने वाले हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को सेबेस्टियन लेकोर्नू को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया था।
क्यों हो रहा विरोध प्रदर्शनः
राष्ट्रपति मैक्रों की नीतियां: जनता के एक बड़े वर्ग को लगता है कि मैक्रों की नीतियां आम लोगों के हितों के खिलाफ हैं और अमीर वर्ग को फायदा पहुंचाती हैं।
बजट में कटौती: सरकार ने खर्चों में कटौती और कल्याणकारी योजनाओं में कमी कर आर्थिक सुधार लागू किए हैं। इससे आम जनता खासकर मध्यमवर्ग और श्रमिक वर्ग पर दबाव बढ़ा है।
2 साल में 5 पीएम: हाल ही में सेबास्टियन लेकोर्नू को प्रधानमंत्री बनाया गया है। यह दो साल से भी कम समय में पांचवें प्रधानमंत्री हैं। इससे लोगों में अस्थिरता और असंतोष बढ़ गया है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि उनकी नियुक्ति की शुरुआत से ही सरकार पर दबाव बनाया जाए।
‘ब्लॉक एवरीथिंग’ आंदोलन: वामपंथी गठबंधन और जमीनी संगठनों ने इस नारे के साथ आंदोलन शुरू किया है ताकि देश में सबकुछ ठप करके सरकार को झुकने पर मजबूर किया जा सके।
ये प्रदर्शन ऐसे समय हो रहे हैं, जब फ्रांस के नए प्रधानमंत्री, सेबास्टियन लेकोर्नू अपना कार्यभार संभालने जा रहे हैं। एक दिन पहले फ्रांस्वा बायरू ने अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।
अब तक 295 लोग गिरफ्तार
फ्रांस में बुधवार को हुए प्रदर्शनों में स्थानीय समयानुसार दोपहर 1 बजे तक कुल 295 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 171 पेरिस में हुए।
करीब 29 हजार लोग इसमें जुटे हैं। सुबह से 106 जगहों पर सड़कें खाली कराई गईं और 105 आगजनी की घटनाएं दर्ज हुईं। चार सुरक्षाकर्मी हल्के रूप से घायल हुए।
वामपंथी और ग्रीन पार्टी का प्रदर्शनकारियों को समर्थन
फ्रांस में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों को वामपंथी राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल रहा है। वामपंथी पार्टी फ्रांस अनबाउड के नेता जां-ल्यूक मेलेंशों ने अगस्त में ही इस आंदोलन का समर्थन किया था। अब इससे अन्य वामपंथी दल भी जुड़ गए।
दो प्रमुख मजदूर संघठनों ने प्रदर्शन में हिस्सा लेने की घोषणा की है। हालांकि ज्यादातर यूनियन 18 सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय हड़ताल का इंतजार कर रही हैं।