पतलीकूहल । हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के दो जांबाज युवाओं ने अपनी हिम्मत और मजबूत इरादों के दम पर लेह-लद्दाख के सबसे दुर्गम और खतरनाक रास्तों पर कामयाबी का परचम लहराया है। कुल्लू की पिछलीहार पंचायत के गांव कास्ता के 30 वर्षीय सौदागर और गांव नेरी के 20 वर्षीय सूरज ने अपनी बाइक पर सवार होकर दुनिया के सबसे ऊंचे मोटर योग्य दर्रे उमलिंग ला पास पर पहुंचने का गौरव हासिल किया है।

इन युवाओं ने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए महज 1 दिन में 486 किलोमीटर की दूरी तय की और पिछले 8 दिनों से लद्दाख के विभिन्न कोनों में लगातार राइडिंग कर रहे हैं। इस साहसिक सफर को पूरा करने पर लद्दाख के टूरिज्म विभाग द्वारा दोनों राइडर्स को आधिकारिक सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया है।
लद्दाख के चांगथांग पठार में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल और डेमचोक गांव के नजदीक स्थित उमलिंग ला पास 19,024 फीट की ऐसी हैरान कर देने वाली ऊंचाई पर है, जहां गर्मियों में भी हड्डियां गला देने वाली ठंड पड़ती है। इस ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से 50 फीसदी तक कम हो जाता है, जिससे अच्छे-भले इंसानों का दम फूलने लगता है और कम ऑक्सीजन के कारण गाड़ियों के भारी-भरकम इंजन भी हांफ जाते हैं। ऐसी विकट परिस्थितियों में भी कुल्लू के इन दोनों बेटों ने अपने हौसले को टूटने नहीं दिया। 1 दिन में 486 किलोमीटर का सफर तय कर इस बेहद खतरनाक दर्रे को फतह करना अपने आप में एक मिसाल है। युवाओं की इस कामयाबी से उनके गृह क्षेत्र पिछलीहार सहित पूरे कुल्लू जिले में खुशी का माहौल है।







