चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते प्रसिद्ध श्री मणिमहेश यात्रा को 25 अगस्त तक स्थगित कर दिया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने यह फैसला लिया है। तोस के गोठ के पास बारिश के कारण यात्रा मार्ग का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। फिलहाल रास्ते की मरम्मत और उसे सुरक्षित बनाने का काम तेजी से चल रहा है।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए लिया फैसला
उपायुक्त चंबा मुकेश रेप्सवाल ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मार्ग की मौजूदा स्थिति और मौसम को देखते हुए अगले तीन दिनों तक यात्रा पर रोक रहेगी। प्रशासन की टीमें क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत में जुटी हैं, ताकि रास्ते को दोबारा सुरक्षित बनाया जा सके। डीसी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि 25 अगस्त तक यात्रा मार्ग पर जाने से बचें और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
मौसम साफ रहा तो 26 अगस्त से यात्रा होगी शुरू
प्रशासन के अनुसार, यदि मौसम और यात्रा मार्ग की स्थिति अनुकूल रहती है तो 26 अगस्त से मणिमहेश यात्रा दोबारा शुरू की जा सकती है। संबंधित विभागों को मार्ग की लगातार निगरानी करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। बारिश के दौरान पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन, फिसलन और अचानक मार्ग क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
आधिकारिक यात्रा 4 सितंबर से 19 सितंबर तक
मणिमहेश की ओर श्रद्धालुओं की अनौपचारिक आवाजाही अक्सर आधिकारिक यात्रा अवधि से पहले ही शुरू हो जाती है। हालांकि, चंबा जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस वर्ष श्री मणिमहेश यात्रा 4 सितंबर से 19 सितंबर तक आयोजित होगी।
इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य रहेगा।
पंजीकरण को लेकर जरूरी बातें
- यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य रहेगा।
- पंजीकरण की रसीद का प्रिंटआउट साथ रखना होगा।
- एक मोबाइल नंबर से अधिकतम पांच लोगों का आवेदन किया जा सकता है।
- भरमौर पहुंचने से पहले पंजीकरण पूरा करने की सलाह दी गई है।
नेटवर्क की समस्या से बचने के लिए पहले कराएं रजिस्ट्रेशन
भरमौर क्षेत्र में बीएसएनएल, जियो और एयरटेल की सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन कई इलाकों में नेटवर्क कमजोर रह सकता है। प्रशासन के अनुसार इंटरनेट की धीमी गति या ओटीपी नहीं मिलने जैसी दिक्कतों का सामना श्रद्धालुओं को करना पड़ सकता है। ऐसे में श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि भरमौर पहुंचने से पहले ही ऑनलाइन पंजीकरण पूरा कर लें।
हड़सर में होगी मेडिकल जांच
मणिमहेश यात्रा शुरू करने से पहले हड़सर बेस कैंप में श्रद्धालुओं की मेडिकल जांच भी की जाएगी। जो व्यक्ति चिकित्सकीय रूप से अस्वस्थ पाया जाएगा, उसे यात्रा शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी तरह 75 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालुओं के मामले में भी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर यात्रा की अनुमति देने का निर्णय लिया जाएगा। यह व्यवस्था ऊंचाई वाले कठिन पहाड़ी मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है मणिमहेश झील
मणिमहेश झील भरमौर से करीब 21 किलोमीटर दूर बुद्धिल घाटी में लगभग 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। झील के ऊपर कैलाश पर्वत की चोटी स्थित है, जिसकी ऊंचाई करीब 18,564 फीट बताई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को इस पवित्र तीर्थ का अधिष्ठाता देवता माना जाता है। हड़सर से आगे धनछो प्रमुख पड़ाव है। झील से लगभग एक किलोमीटर पहले गौरी कुंड और शिव क्रोत्री भी स्थित हैं, जिनका धार्मिक महत्व है।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सावधानी
मणिमहेश यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ कठिन पहाड़ी परिस्थितियों से भी जुड़ी है। बारिश के दौरान रास्तों पर फिसलन और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए प्रशासन की अनुमति और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा करना सुरक्षित रहेगा।







