नगरोटा बगवां। भारतीय वायुसेना के शहीद विंग कमांडर नमांश स्याल की पार्थिव देह जब रविवार को उनके पैतृक गांव पटियालकड़ पहुंची, तो पूरा इलाका गम और गर्व से भर उठा। सैन्य सम्मान के बीच जब उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, तो हर आंख नम थी और सभी ने अपने वीर सपूत को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। ”नमांश स्याल अमर रहें और भारत माता की जय” के जयकारों और शोक के बीच उन्हें पैतृक भूमि में पंचतत्व में विलीन किया गया।
गांव की गलियों में लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। अंतिम संस्कार की तैयारियां प्रशासन की देखरेख में की गई। जिले के अधिकारी, सेना के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।
सेना के जवानों द्वारा तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को जैसे ही गांव लाया गया, लोगों की भीड़ अपने वीर सपूत की एक झलक पाने उमड़ पड़ी। हर किसी की आंखें नम थीं और वातावरण ‘शहीद नमांश अमर रहे’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा।
नमांश स्याल को श्रद्धांजलि देने के लिए हजारों लोग उनके घर पहुंचे। हर एक आंखें नम दिखाई दे रही थी। नमांश अमर रहे के नारों के साथ नगरोटा बगवां का पटियालकड़ गांव गूंज उठा।
परिवार के सदस्यों, पत्नी, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने अश्रुपूर्ण आंखों से अपने लाल को अंतिम विदाई दी। शहीद के माता-पिता और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था, जबकि ग्रामीणों ने कहा कि नमांश ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देकर गांव और प्रदेश का नाम हमेशा के लिए ऊंचा कर दिया है।
सैन्य सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। अधिकारियों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका यह बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा और देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।
श्रद्धांजलि देने पहुंचे हिमाचल के कैबिनेट मंत्री
हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से खेल, कानून एवं विधि मंत्री यादविंद्र गोमा और कैबिनेट रैंक आरएसएस बाली श्रद्धाजंलि
देने पहुंचे । प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि दुबई एयर शो में हुए तेजस विमान हादसे में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले के वीर सपूत नमांश स्याल जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद और हृदयविदारक है।
विंग कमांडर नमांश स्याल का शहादत रूपी बलिदान केवल एक परिवार या एक गांव की क्षति नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के हृदय पर अंकित गहरी पीड़ा है। उन्होंने दुबई एयर शो के दौरान लोगों की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर यह साबित किया कि एक भारतीय सैनिक की सबसे बड़ी पहचान उसका कर्तव्य और दूसरों के प्रति समर्पण होता है।
पटियालकड़ गांव में उमड़ी भीड़, बहते आंसू, गूंजते जयघोष और तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर ने यह संदेश दिया कि वीर कभी मरते नहीं…वे इतिहास और प्रेरणा बनकर जीवित रहते हैं।
नमांश स्याल की यह शहादत आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्य, साहस और राष्ट्रभक्ति का रास्ता दिखाती रहेगी। आज पूरा देश इस वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह प्रण लेता है कि उनके सपनों, उनके मूल्यों और उनके बलिदान को हमेशा जीवित रखा जाएगा। उनका बलिदान अमर है, उनकी स्मृति अमिट है…..भारत माता ऐसे सपूतों पर सदैव गर्व करती रहेगी।