शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लिया है। सुक्खू सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब हिमाचल में बीएड की डिग्री दो की बजाय चार वर्षों में पूरी की जाएगी।
यह परिवर्तन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप है और शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा। इससे पहले बीएड की डिग्री दो साल में होती थी, लेकिन अब सुक्खू सरकार ने इसे चार साल की कर दिया है। बड़ी बात यह है कि पहले बीएड करने के लिए स्नातक डिग्री लेनी पड़ती थी। लेकिन अब छात्र सीधे 12वीं कक्षा के बाद बीएड में दाखिला ले सकेंगे।
चार कॉलेजों में होगी शुरुआत
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज सोमवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कार्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। जिसके लिए चार कॉलेजों को चयनित किया गया है। धर्मशाला, नादौन, चायल कोटी और टिक्कर स्थित सरकारी महाविद्यालयों में सबसे पहले चार साल की बीएड डिग्री कोर्स शुरू किया जाएगा।
पाठ्यक्रम निर्माण की जिम्मेदारी एचपीयू को
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस तरह के कार्यक्रम का प्रावधान पहले ही किया गया था। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ;भ्च्न्द्ध को कोर्स के पाठ्यक्रम और संरचना तैयार करने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। राज्य शिक्षा विभाग काफी समय से इस बदलाव पर काम कर रहा था, जिसमें अब औपचारिक मुहर लग गई है।
2030 से बदलेगी पात्रता
वर्तमान में हिमाचल के महाविद्यालयों में बीएड की अवधि दो वर्ष है। लेकिन NEP-2020 के अनुसार वर्ष 2030 के बाद शिक्षक भर्ती के लिए न्यूनतम पात्रता चार वर्षीय बीएड डिग्री होगी।
ऐसे में आरएंडपी (भर्ती व पदोन्नति) नियमों को भी सरकार को संशोधित करना पड़ेगा। पहले से दो वर्षीय बीएड करने वाले विद्यार्थियों को भविष्य में ब्रिज कोर्स करवाने का विकल्प दिया जा सकता है।
बीएड की सीटें खाली रहने का संकट
राज्य में इस समय 73 बीएड कॉलेज और करीब 8000 सीटें हैं, जिनमें से बड़ी संख्या हर साल खाली रह जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीए, बीएससी और बीकॉम की तरह बीएड को भी इंटीग्रेटेड कोर्स के रूप में लाने से छात्रों की रुचि बढ़ेगी और एडमिशन में सुधार आएगा।
हमीरपुर कॉलेज बनेगा विज्ञान महाविद्यालय
कैबिनेट ने हमीरपुर कॉलेज को पूरी तरह विज्ञान महाविद्यालय के रूप में विकसित करने की मंजूरी दी है। यहां पर इंटीग्रेटेड बीएसई-बीएड कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही हमीरपुर के लड़कों और लड़कियों के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को एकीकृत कर को-एजुकेशन मॉडल में संचालित करने का निर्णय भी लिया गया है।
सुक्खू सरकार का चार वर्षीय B.Ed कोर्स लागू करने का फैसला हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े और निर्णायक बदलाव की ओर इशारा करता है। इससे न केवल शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि आधुनिक शिक्षा पद्धति के अनुरूप प्रशिक्षित शिक्षक तैयार करने में भी मदद मिलेगी। नई व्यवस्था से समय और संसाधनों की बचत होगी तथा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पहले से अधिक सुलभ होंगे। कुल मिलाकर यह निर्णय प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।