7508 प्रधान-उपप्रधान संभालेंगे पूरी जिम्मेदारी, 31 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि मानदेय के होंगे पात्र
शिमला। हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतों में 27 जून से प्रशासनिक और विकासात्मक गतिविधियों का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। पंचायतीराज चुनावों के बाद चुने गए हजारों जनप्रतिनिधियों को अब अपने अधिकारों का वास्तविक उपयोग करने का अवसर मिलेगा। प्रदेश की सभी पंचायतों में 27 जून को पहली आधिकारिक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसके साथ ही 7508 नवनिर्वाचित पंचायत प्रधान और उपप्रधान वित्तीय शक्तियों से लैस हो जाएंगे। यही नहीं पंचायतों की आधिकारिक मोहर भी उनके अधिकार में आ जाएगी, जिससे विकास कार्यों, भुगतान प्रक्रियाओं और प्रशासनिक निर्णयों में तेजी आने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम-1994 के तहत पंचायत प्रधान और उपप्रधान का कार्यकाल केवल चुनाव परिणाम घोषित होने से शुरू नहीं माना जाता। कानून के अनुसार उनका कार्यकाल तब प्रभावी होता है जब सरकार द्वारा निर्धारित पहली आधिकारिक बैठक आयोजित होती है। इस बैठक में प्रधान पंचायत के वार्ड सदस्यों को शपथ दिलाते हैं और पंचायत की नई कार्यप्रणाली औपचारिक रूप से आरंभ होती है। इस बार प्रदेशभर की पंचायतों के लिए यह महत्वपूर्ण तारीख 27 जून तय की गई है।

गांवों में विकास कार्यों को मिलेगी नई गति
वित्तीय शक्तियां मिलने के बाद पंचायतें लंबित विकास कार्यों को आगे बढ़ा सकेंगी। मनरेगा, ग्रामीण पेयजल, संपर्क मार्ग, सामुदायिक भवनों के रखरखाव, स्वच्छता अभियान और अन्य पंचायत स्तरीय योजनाओं से जुड़े भुगतान और प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकेगी। इससे गांवों में रुके हुए कार्यों को गति मिलने की संभावना है।
31 हजार से अधिक जनप्रतिनिधियों को मिलेगा मानदेय
27 जून को होने वाली पहली बैठक का महत्व केवल वित्तीय अधिकारों तक सीमित नहीं है। इसी दिन से प्रदेश भर के 31 हजार 182 नवनिर्वाचित पंचायतीराज जनप्रतिनिधि मानदेय प्राप्त करने के पात्र भी बन जाएंगे। इनमें पंचायत प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य शामिल हैं।
प्रधान और उप-प्रधान का कार्यकाल 27 जून को होने वाली पहली बैठक के साथ औपचारिक रूप से शुरू माना जाएगा। ऐसे में अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार वित्तीय कार्यों के लिए प्रधान पहली बैठक से ही सरकारी मोहर का इस्तेमाल कर सकते हैं।-राघव शर्मा, निदेशक, पंचायतीराज विभाग।








