पांवटा साहिब । पांवटा साहिब में घर के परिसर से रेस्क्यू किया गया करीब 10 फीट लंबा दुर्लभ किंग कोबरा अब अपने प्राकृतिक आवास में लौट गया है। वन विभाग ने कुछ समय तक निगरानी में रखने के बाद शनिवार को इस विशाल सांप को खारा के जंगल में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया।

यह किंग कोबरा 29 सितंबर को बैंकुआ-जामनीवाला रोड पर पेट्रोल पंप के समीप स्थित गुरबख्श सिंह के घर के परिसर में पहुंच गया था। घर के टॉयलेट में विशाल सांप देखकर परिवार के साथ आसपास के लोगों में भी हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर क्षेत्र के चर्चित स्नेक रेस्क्यूअर भूपेंद्र सिंह ने इसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया था।
घर के परिसर में पहुंचा था विशाल किंग कोबरा
29 सितंबर को किंग कोबरा के घर के नजदीक दिखाई देने से परिवार में दहशत फैल गई। करीब 10 फीट लंबे इस सांप को देखकर तत्काल रेस्क्यू टीम को सूचना दी गई। जानकारी मिलते ही स्नेक मैन भूपेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और आवश्यक सावधानी बरतते हुए किंग कोबरा को रेस्क्यू किया। इसके बाद सांप को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया। वन विभाग ने किंग कोबरा को कुछ समय ऑब्जरवेशन में रखा, ताकि उसकी स्थिति और स्वास्थ्य सामान्य होने की पुष्टि की जा सके।
स्वस्थ मिलने पर खारा के जंगल में रिलीज
वन विभाग के अनुसार निगरानी के दौरान किंग कोबरा की स्थिति सामान्य पाई गई। इसके बाद शनिवार को उसे उसके लिए उपयुक्त प्राकृतिक वातावरण में खारा के जंगल में छोड़ दिया गया। डीएफओ पांवटा साहिब वेद प्रकाश ने किंग कोबरा के सुरक्षित रिलीज किए जाने की पुष्टि की है।
आखिर आबादी के करीब क्यों पहुंचते हैं किंग कोबरा?
विशेषज्ञों के अनुसार सांप आम तौर पर इंसानों पर हमला करने के उद्देश्य से आबादी वाले इलाकों में नहीं आते। जंगल और प्राकृतिक आवास में बदलाव, भोजन की तलाश, मौसम में परिवर्तन तथा पानी और हरियाली जैसे कारक उन्हें कई बार मानव बस्तियों के नजदीक ला सकते हैं। किंग कोबरा मुख्य रूप से दूसरे सांपों को भोजन बनाता है। ऐसे क्षेत्रों में जहां सांपों की संख्या अधिक हो, वहां वह भोजन की तलाश में पहुंच सकता है। पांवटा साहिब का आसपास का क्षेत्र जंगल, खेत और मानव बस्तियों के मिश्रण वाला है। ऐसे भू-दृश्य में वन्यजीवों का आबादी के करीब दिखाई देना संभव है।
किंग कोबरा का विष गंभीर खतरा पैदा कर सकता है
किंग कोबरा दुनिया की सबसे बड़ी विषैली सांप प्रजाति है। इसका विष इंसान के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे में इसके काटने की स्थिति में तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है। भारत में सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाला पॉलीवैलेंट एंटी-स्नेक वेनम मुख्य रूप से इंडियन कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसी प्रमुख विषैली प्रजातियों के विष के खिलाफ तैयार किया जाता है। इसलिए किंग कोबरा के काटने को सामान्य सांप के काटने जैसा मानकर उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए।
27-28 साल से पांवटा में सांपों का रेस्क्यू कर रहे भूपेंद्र
पांवटा साहिब में स्नेक मैन के नाम से पहचान बना चुके भूपेंद्र सिंह मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं। वह पिछले करीब 27-28 वर्षों से पांवटा साहिब में रह रहे हैं। वह निजी कंपनी में ठेकेदारी का काम करते हैं, लेकिन जहरीले और खतरनाक सांपों को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने के कारण क्षेत्र में उनकी अलग पहचान बन गई है। भूपेंद्र सिंह के अनुसार वह अब तक हजारों सांपों का रेस्क्यू कर चुके हैं। उनका उद्देश्य सांपों को मारने के बजाय उन्हें सुरक्षित तरीके से उनके प्राकृतिक आवास तक पहुंचाना है।








