वरिष्ठ संवाददाता, शिमला
हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसों के ग्राफ में इजाफा आया है। राज्य में शुरूआती 7 महीनों में पेश आए सड़क हादसों के आंकडों पर नजर दौड़ाई जाए तो पहाडी प्रदेश में उक्त अवधि के दौरान हादसों में 2.81 फीसदी तक का इजाफा आया है। हालांकि उक्त अवधि के दौरान हादसों की प्रतिशतता में गिरावट आई है। मगर घायलों की संख्या में बढोतरी आई है।
राज्य में बीते साल शुरूआती 7 महिनों के दौरान 1280 सड़क हादसें पेश आए थे।
इस साल उक्त अवधि के दौरान इनकी संख्या बढ़ कर 1316 तक पहुंच गई है। बीते साल सात महिनों में पेश आए हादसों में 622 लोगों की मौत हुई थी। जबकि इस साल यह आंकडा 521 है। हालांकि मृत्यु दर में गिरावट प्रदेश के लिए सुखद खबर है। मगर प्रदेश में आए दिन सड़क हादसें पेश आ रहे है। हादसों में बढोतरी आने प्रदेश के लिए चिंता का विषय है। इस साल पेश आए हादसों में 2298 लोग घायल हुए है।
इस साल पेश सबसे ज्यादा हादसें कांगडा में पेश आए है। कांगडा में 217 हादसें हुए है। बद्दी में 59, बिलासपुर मं 88, चम्बा में 53, हमीरपुर में 62, किन्नौर में 17, कुल्लू में 101, लाहौल स्पीति में 7, मंडी में 187, शिमला में 183, सिरमौर में 141, सोलन में 87 और ऊना में 114 हादसें घटे है।
हालांकि कांगडा में ज्यादा हादसें पेश आए है। मगर हादसों में सबसे ज्यादा मौतें जिला शिमला में हुई है। जिला शिमला में 183 हादसों में 92 लोगों की मौतें हुई है। मंडी व कांगडा में 64-64 मौतें हुई है। ऊना में 50, चम्बा में 44 व कुल्लू में पेश आए हादसों में 41 लोग अंकाल मौत का ग्रास बने है।
खतरनाक ड्राईविंग के चलते पेश आए ज्यादा हादसें
प्रदेश में सात माह के दौरान सबसे ज्यादा हादसें मानवीय चूक के चलते पेश आए है। 470 हादसें खतरनाक ड्राईविंग के चलते घटित हुए है। जो बीते साल के मुकाबले दोगुना है। हालांकि ओवर स्पीड के चलते पेश आने वाले हादसो के आंकडों में गिरावट आई है। मगर राज्य में अभी ओवर स्पीड के चलते 355 हादसें घटे है। राज्य में टनिंग विदऑउट केयर के चलते भी 106 हादसें घटित हुए है।









