राजेश कुमार: धर्मशाला।
जिला कांगड़ा के 5 दिवसीय दौरे पर आए आरएसएस प्रमुख डा. मोहन राव भागवत सोमवार सुबह बौद्ध गुरु दलाईलामा से मिलने मैक्लोडगंज पहुंचे। दोनों में करीब 50 मिनट तक बंद कमरे में मंत्रणा हुई। बौद्ध गुरु और आरएसएस प्रमुख की मंत्रणा को कई मायने में अहम माना जा रहा है। दलाईलामा जहां तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु हैं, वहीं डा. मोहन भागवत आरएसएस के प्रमुख हैं। दोनों प्रमुख हस्तियों की इस मुलाकात विश्व शांति, जन कल्याण और तिब्बत मसले को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दलाईलामा से मिलने उपरांत आरएसएस प्रमुख वापिस लौट गए। गौरतलब है कि दलाईलामा की कोविड काल के बाद सोमवार को दूसरी पब्लिक मीटिंग थी। दलाईलामा ने अनुयायियों व बौद्ध भिक्षुओं से इसी माह मिलना शुरू किया था।
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि आरएसएस प्रमुख डा. मोहन भागवत और तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाईलामा के बीच बहुत सी चर्चा हुई हैं। चर्चा के दौरान दलाईलामा ने कहा कि समय आ गया है कि विश्व शांति और संघर्षों से मुक्त करने के लिए भारत धार्मिक सदभाव का सर्वोत्तम उदाहरण है। दलाईलामा ने कहा कि आज विश्व शांति की जरूरत है, पूरे विश्व को यह जानना होगा तथा भारत को भी यह जानना और मानना होगा। दुनिया में विस्तारवार को रुकना होगा और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।
इंद्रेश कुमार, आरएसएस नेता
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने बताया कि आरएसएस प्रमुख डा. मोहन भागवत ने दलाईलामा से बातचीत में कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति इन्क्लूसिव है, जो सबको साथ लेकर चलती है। धार्मिक सदभाव का विश्व का सर्वोत्तम माडल भारत है। जितने भी आसपास देश हैं, हमारे सब भाई हैं और तिब्बत हमारा भाई देश है। इसलिए हम तिब्बत के हर सुख-दुख में साथ रहे हैं और रहेंगे।
इंद्रेश कुमार, आरएसएस नेतातिब्बत निर्वासित सरकार के राष्ट्रपति पेम्पा छेरिंग ने कहा कि मैं मीटिंग में नहीं था, लेकिन दलाईलामा और आरएसएस नेता मोहन भागवत के बीच मानवता और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा हुई है। भारत का तिब्बत को सहयोग लगातार मिलता रहा है, भारत देश, तिब्बत की स्वतंत्रता की वकालत करता रहा है।
पेम्पा छेरिंग, राष्ट्रपति, तिब्बत निर्वासित सरकार








