चंद्र ठाकुर। नाहन
वर्तमान में देश में मीठे के विकल्प के रूप में चीनी का प्रयोग बहुतायत होता है। यद्यपि समय-समय पर विभिन्न शोध जन सामान्य को चीनी के प्रयोग की हानियों के बारे में जागरूक करते रहते हैं।
चीनी के प्रति लोगों का मोह लगातार बढऩे के कारण देश का जन सामान्य मीठे के इस उत्कृष्ट स्वरूप को भूल से आ गया है, जिसका अविष्कार विश्व में सबसे पहले भारत में 3000 वर्ष पूर्व गुड के रूप में हुआ था। गुड़ के इसी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और स्वास्थ्यवर्धक स्वरूप का बखान सोंधी धरती मीठा गुड़ फिल्म।
इस फिल्म को 1 सप्ताह पूर्व संस्कृति मंत्रालय के सांस्कृतिक स्रोत केंद्र द्वारा प्रदर्शन के लिए जारी किया गया है। फिल्म की पटकथा लेखन और निर्देशन डॅ. संजीव अत्री द्वारा किया गया है।
23 मिनट की इस फिल्म में अर्थवेद से लेकर वर्तमान तक गुड़ की स्थिति को दर्शाया गया है। फिल्म में गुड़ निर्माण की पारंपरिक विधियों और तकनीकों का वर्णन करते हुए बताया गया है कि भारत की यह सांस्कृतिक विरासत वर्तमान में किन आर्थिक सामाजिक और व्यवसायिक परिस्थितियों का सामना कर रही है।
फिल्म गुड को भारत की राष्ट्रीय मिठाई घोषित करने की मांग करती है। फिल्म में एशिया की सबसे बड़ी मुजफ्फरनगर गुड़ मंडी की स्थिति को भी दिखाया गया है। इसे उत्तर प्रदेश और गोवा में फिल्माया गया है। पटकथा के माध्यम से फिल्म गुड़ जैसी उत्कृष्ट वह महत्वपूर्ण खोज को सहेजने की बात करती है।
फिल्म का संपादन भगवान वर्मा, पाश्र्व ध्वनि और संगीत नूपुर कुलश्रेष्ठा, फिल्मांकन संदीप मिश्रा और निर्माण सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र भारत सरकार द्वारा किया गया है। संजीव अत्री ने बताया कि फिल्म का निर्माण विशेष रूप से बच्चों के लिए किया गया है ताकि वर्तमान पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझ और संभाल सके। फिल्म को पूरे देश में प्रदर्शित कर के बच्चों तक पहुंचाया जाएगा।





