12 जुलाई को हामटा में देवता जमदग्नि ऋषि से होगा पावन मिलन
पतलीकूहल। देवभूमि हिमाचल की समृद्ध देव संस्कृति के बीच गत देर शाम बंजार घाटी के आराध्य देवता श्रृंगा ऋषि अपने भव्य देव रथ और हजारों श्रद्धालुओं के साथ नग्गर पहुंचे। देवता के आगमन पर पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों और जयघोष के साथ देवता का भव्य स्वागत किया। नग्गर पहुंचने पर देवता श्रृंगा ऋषि ने जगती पट मंदिर में विधिवत हाजिरी भरी। इसके उपरांत देवता ने माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में रात्रि विश्राम किया।

देवता के साथ आए हजारों श्रद्धालुओं के लिए नग्गरवासियों द्वारा श्रद्धापूर्वक रात्रि भोज की व्यवस्था की गई, जो देव संस्कृति में सेवा और समर्पण की अनुपम मिसाल बनी। गुरुवार प्रात: देवता श्रृंगा ऋषि अपने अगले पावन पड़ाव के लिए रवाना हुए। यह यात्रा विशेष धार्मिक महत्व रखती है, क्योंकि 24 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 12 जुलाई को ऊझी घाटी के हामटा में देवता श्रृंगा ऋषि और देवता जमदग्नि ऋषि का दिव्य महामिलन होगा।
हजारों श्रद्धालुओं के हामटा पहुंचने की संभावना
इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अवसर के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालुओं के हामटा पहुंचने की संभावना है। देवता श्रृंगा ऋषि के पुजारी जितेंद्र ने बताया कि यह संपूर्ण यात्रा देव आज्ञा के अनुसार संपन्न की जा रही है। उन्होंने कहा कि 12 जुलाई को हामटा में दो महान दिव्य शक्तियों का पावन महामिलन होगा, जो देव परंपरा में अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक अवसर माना जाता है।
हामटा, देवता जमदग्नि ऋषि के बारह देऊ घरों में से एक प्रमुख
उल्लेखनीय है कि हामटा, देवता जमदग्नि ऋषि के बारह देऊ घरों में से एक प्रमुख देऊघर है। यहां होने वाला यह महामिलन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि कुल्लू की प्राचीन देव संस्कृति, लोक परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिव्य मिलन के दर्शन और देव आशीर्वाद से क्षेत्र में सुख, समृद्धि, शांति और लोककल्याण का संदेश प्रसारित होगा। पूरे क्षेत्र में इस ऐतिहासिक देव मिलन को लेकर श्रद्धालुओं में गहरा उत्साह और भक्ति का वातावरण व्याप्त है।








