सोलन। जिला सोलन के राजकीय प्राथमिक विद्यालय सलोगड़ा की स्थिति इन दिनों बेहद दयनीय है। स्कूल भवन जर्जर हालत में होने के कारण बच्चों को मंदिर परिसर में पढ़ाई करनी पड़ रही है। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसे में सुक्खू सरकार के बेहतर शिक्षा व्यवस्था देने के दावे यहां कहीं न कहीं फेल होते नजर आ रहे हैं।
वहीं, इस बात को लेकर सोमवार को स्थानीय ग्रामीणों, बच्चों के अभिभावकों ने हिमाचल किसान सभा के बैनर तले प्रशासन से मुलाकात की और उपायुक्त सोलन को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि विद्यालय भवन के पुनर्निर्माण कार्य को तत्काल प्राथमिकता दी जाए, अन्यथा व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सड़क निर्माण के दौरान भवन को पहुंची थी क्षति
ग्राम पंचायत सलोगड़ा की प्रधान सरोज चौहान ने बताया कि ‘स्कूल की जर्जर हालत के चलते अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। NHAI के सड़क निर्माण के दौरान स्कूल भवन को क्षति पहुंची थी, जिसके बाद बच्चों को अस्थायी कक्षाओं में पढ़ाया जा रहा है। इससे न केवल शिक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सुरक्षा का भी खतरा बढ़ गया है।’ ग्रामीणों ने मांग की है कि स्कूल भवन के निर्माण कार्य को जिला प्रशासन की प्राथमिक सूची में शामिल किया जाए। शिक्षा विभाग, लोक निर्माण विभाग और NHAI के बीच समन्वय कर जल्द निर्माण कार्य शुरू किया जाए।
अभिभावकों का कहना है कि जब तक भवन तैयार नहीं होता, तब तक बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अस्थायी कक्षाओं में पर्याप्त प्रबंध किए जाएं। निर्माण कार्य की निगरानी के लिए स्थानीय किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की समिति बनाई जाए और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखा जाए। स्थानीय लोगों और हिमाचल किसान सभा ने चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में प्रशासन ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो संगठन स्थानीय जनता और अभिभावकों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेगा।
सलोगड़ा स्कूल की दयनीय स्थिति यह दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था अब भी उपेक्षा का शिकार है। जहां एक ओर सरकार हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित शिक्षा देने के वादे करती है, वहीं दूसरी ओर बच्चे आज भी जर्जर भवनों और अस्थायी व्यवस्थाओं में पढ़ने को मजबूर हैं। मंदिर परिसर में कक्षाएं लगाना किसी अस्थायी समाधान से अधिक नहीं, बल्कि एक गंभीर समस्या की ओर संकेत है।
यह स्थिति न केवल बच्चों की शिक्षा में बाधा डाल रही है, बल्कि उनकी सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक विकास पर भी नकारात्मक असर डाल रही है। ऐसे में आवश्यक है कि प्रशासन और शिक्षा विभाग तत्काल हस्तक्षेप करें, भवन की मरम्मत या नया स्कूल भवन निर्माण करवाएं और बच्चों को ऐसा वातावरण दें जहाँ वे निडर होकर, सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से शिक्षा प्राप्त कर सकें।
सलोगड़ा स्कूल के हालात एक चेतावनी हैं कि अगर अब भी ध्यान नहीं दिया गया, तो ‘शिक्षा सबके लिए’ का सपना केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।