हिमाचल प्रदेश में जीरो एनरोलमेंट वाले स्कूलों से स्टॉफ को शिफ्ट करने की तैयारियां शुरू हो चुकी है। इन स्कूलों से स्टॉफ और शिक्षकों को ऐसे स्कूलों में भेजा जाएगा जहां पर कोई भी रेगुलर टीचर नहीं है। इसके अलावा स्कूलों में सरप्लस स्टॉफ को लेकर भी शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों से ब्यौरा तलब कर लिया है। इन्हें भी इधर से उधर शिफ्ट करने की तैयारी है। वहीं स्कूलों में पढ़ा रहे टीजीटी, पीजीटी टीचरों के युक्तिकरण को लेकर भी शिक्षा विभाग ने मसौदा तैयार कर लिया है।
मंगलवार को शिक्षा विभाग की रिव्यू बैठक में विभिन्न 15 एजेंडों पर चर्चा हुई। बैठक में स्कूलों में सरप्लस स्टॉफ को लेकर चर्चा की गई। जिसमें मंत्री ने कहा कि ऐसे शिक्षक जिनकी संख्या स्कूलों में ज्यादा है। उन्हें इधर से उधर किया जाए। इन टीचरों को ऐसी जगहों पर भेजा जाएगा जहां पर कोई भी टीचर नहीं है। राज्य में करीब 80 से 90 स्कूल ऐसे हैं जोकि बिना अध्यापकों के चल रहे हैं।
वहीं, सरप्लस टीचरों को ऐसे स्कूलों में भेजा जाएगा जहां पर 20 से ज्यादा बच्चे हैं और केवल एक ही टीचर है। राज्य में ऐसे करीब 450 स्कूल हैं जोकि केवल एक ही टीचर के सहारे चल रहे हैं।
वर्ल्ड बैंक में डाले जाएंगे स्कूल रेनोवेशन के कार्य
बैठक में मॉनसून के दौरान स्कूलो को हुए नुकसान को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन प्रोजेक्टों को वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्टों में डाला जाए। इस बार मॉनसून में हिमाचल के स्कूलों को 121 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा है। इस आपदा में 1411 स्कूलों को क्षति पहुंची है। रेगुलर बजट में भी इन्हेंं डाला जाएगा ताकि जल्द से जल्द स्कूलों का रेनोवेशन किया जा सके।
हाईकमान लेगा अंतिम निर्णय
दिल्ली से लौटे शिक्षा मंत्री ने शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अध्यक्ष पद को लेकर जो निर्णय लेना होगा वह हाईकमान लेगा और यह निर्णय सर्वमान्य होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हाईकमान ने जो बात उसने पूछी थी वह उनके समक्ष रख दी गई है। ऐसे में अब उनका निणर्य अंतिम होगा।
बढ़ाया जाएगा यूनिवर्सिटी का फंड
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में सैलरी को लेकर प्रदर्शन कर रहे टीचरों पर मंत्री ने कहा कि सैलरी संबंधित समस्या दूर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि फंडिग बढ़ाने को लेकर अगर प्रस्ताव आएगा तो इस पर विचार किया जाएगा।
हिमाचल के उन स्कूलों में जहां एनरोलमेंट नगण्य या शून्य है, वहां तैनात शिक्षक और अन्य स्टाफ को आवश्यकतानुसार अन्य स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा। यह कदम शिक्षा विभाग द्वारा संसाधनों के कुशल उपयोग और स्कूल संचालन में सुधार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
स्थानांतरण के माध्यम से न केवल खाली पड़े स्कूलों में कार्यरत कर्मचारियों का बेहतर समायोजन होगा, बल्कि अन्य स्कूलों में शिक्षण गतिविधियों की गुणवत्ता और निरंतरता भी बनी रहेगी। साथ ही, सरप्लस स्टाफ को नई तैनाती मिलकर वे अपनी विशेषज्ञता का पूर्ण उपयोग कर सकेंगे।
इस तरह के कदमों से शिक्षा व्यवस्था में संतुलन कायम रहेगा, कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ेगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी।