नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। तालिबान प्रतिनिधि के भारत दौरे के दौरान हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को बाहर रखने के फैसले ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधा संबोधित करते हुए कहा कि यदि महिलाओं के अधिकारों की बात केवल चुनावी फायदे के लिए नहीं की जाती, तो भारत की महिला पत्रकारों के साथ ऐसी बेइज्जती कैसे होने दी गई?
उन्होंने लिखा —> “प्रधानमंत्री जी, कृपया स्पष्ट करें कि तालिबान प्रतिनिधि की प्रेस कॉन्फ्रेंस से महिला पत्रकारों को हटाने पर आपकी क्या स्थिति है? महिलाओं के अधिकार केवल चुनावी पोस्टरिंग नहीं हैं। भारत की महिलाएं इस देश की रीढ़ और गर्व हैं।”
वहीं, आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने भी इस घटना को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर रखना न केवल भारत की कूटनीतिक और नैतिक स्थिति को कमजोर करता है, बल्कि यह प्रेस की स्वतंत्रता, लैंगिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ भी है।
मनोज झा के मुताबिक, “यह सिर्फ एक औपचारिक गलती नहीं, बल्कि भारत की उन प्रतिबद्धताओं से विचलन है, जिन पर हमारा लोकतंत्र टिका है। दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति से ऐसी घटना निराशाजनक और राजनीतिक दृष्टि से दूरदर्शिता की कमी दिखाती है।”
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के कदम से यह गलत संदेश जाता है कि तात्कालिक कूटनीतिक लाभों को सिद्धांतों से ऊपर रखा जा सकता है, जो भारत की छवि के लिए घातक है।
गौरतलब है कि शुक्रवार को आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसी भी महिला पत्रकार को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसकी तीव्र आलोचना शुरू हो गई। कई पत्रकारों और यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में भी अब तालिबानी सोच को जगह दी जा रही है।