हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति और किन्नौर जिला के बीच जल्द ही 55 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। सबसे अहम बात यह है कि सेना को सीमांत इलाकों तक पहुंचने के लिए नया और वैकल्पिक मार्ग मिलने जा रहा है।
सामरिक दृष्टि से यह सड़क बेहद ही महत्चपूर्ण मानी जा रही है। इस बाबा-मूद सड़क बनने से सडक़ मार्ग के बन जाने से आपातकाल के समय सेना को कम समय में मदद पहुंच जाएगी।
सैन्य अधिकारियों और राज्य सरकार के बीच इस सडक़ परियोजना को लेकर बैठक हो चुकी है। जिसमें सैना की और से बताया गया कि इस सडक़ का निर्माण सेना ही करेगी। इससे न केवल सीमा क्षेत्र में सैनिकों की तैनाती आसान होगी, बल्कि रसद आपूर्ति भी आसान हो जाएगी। बॉर्डर एरिया में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए भी यह सडक़ बेहतर विकल्प होगी।
गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल से बीते कुछ वर्षों में सामरिक सडक़ों की संख्या में हर वर्ष औसतन 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा रही है। राज्य सरकार के अधिकारियों का मानना है कि बाबा-मूद सडक़ बनने से न केवल सेना को राहत मिलेगी बल्कि लाहुल-स्पीति और किन्नौर में पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बल मिलेगा।
चीन से सटे बॉर्डर एरिया में मजबूत होगा बुनियादी ढांचा
तिब्बत में चीन द्वारा तेजी से हो रहे बुनियादी ढांचे के विकास को देखते हुए केंद्र सरकार सीमा से सटे इलाकों में सडक़ नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। लाहुल-स्पीति और किन्नौर जैसे कठिन भौगोलिक इलाकों में सडक़ों का जाल बिछाने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।
बीआरओ की 100 से अधिक परियोजनाएं निर्माणाधीन
राज्य लोक निर्माण विभाग और सीमा सडक़ संगठन (बीआरओ) की रिपोर्ट के अनुसार अब तक हिमाचल में 250 से अधिक सामरिक सडक़ों का निर्माण या विस्तारीकरण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 100 से अधिक परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इन सडक़ों के माध्यम से सेना की सीमांत चौकियों तक तेज और सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।