हिमाचल प्रदेश में निवेशकों को रिझाने के लिए उद्योग विभाग ने सालों से जमीन जुटा रखी है, परंतु उसपर निवेश नहीं करवा पा रहा। निवेशकों की पहली पसंद सीमाई क्षेत्र हैं जहां पर वो निवेश करना चाहते हैं, परंतु उद्योग विभाग के पास जो जमीन है वो अंदरूनी क्षेत्रों में हैं, जिस पर उद्योग लगाने वाले नहीं मिल रहे। इतना ही नहीं अपने लैंड बैंक में उद्योग विभाग के पास जो जमीन है उसे भी वह डेवलप नहीं कर पा रहा है, जिसके लिए उसके पास पैसा नहीं है।
बताया जाता है कि उद्योग विभाग के पास प्रदेश में 8 हजार बीघा से ज्यादा का लैंड बैंक है। मगर दिक्कत यही है कि यह प्रदेश के अंदरूनी क्षेत्रों में है जहां पर निवेशक नहीं बसना चाहते। यदि कोई बसना चाहता भी है तो वहां पर जमीन समतल नहीं है जिसे समतल करवाकर डेवलप करने के लिए उद्योग विभाग के पास पैसा नहीं है।
उद्योग विभाग के पास शिमला, सिरमौर, सोलन, बिलासपुर, कांगड़ा जिला में उद्योग क्षेत्र स्थापित करने के लिए जमीन है परंतु इनपर निवेशक नहीं आ रहे हैं। हालांकि सरकार जमीन उपलब्ध करवाकर विशेष सबसिडी भी यहां पर निवेशकों को दे रही है परंतु फिर भी कोई रूझान नहीं दिखा रहा। उद्योग विभाग की वैबसाइट पर उसके लैंड बैंक की पूरी जानकारी है। सालों से निजी जमीन खरीदकर रखी गई है जिसपर करोड़ों रूपए का खर्चा भी किया गया लेकिन इस जमीन को खरीदने के लिए निवेशक नहीं आ रहे हैं।
अब नए सिरे से वर्तमान सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है और उसने नए उद्योग क्षेत्र यहां पर स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मगर यह भी सीमाई क्षेत्रों में ही है और जिस तरह का रूझान है तो निवेशकों को जमीन चाहिए भी वहीं पर। ऐसे में अंदरूनी क्षेत्रों में निवेश लाने की सरकार की मंशाएं फलीभूत नहीं हो पा रही हैं।
प्रदेश में निवेश केवल बीबीएन एरिया तक सिमटकर रह गया है। हाल ही में सरकार ने पांच नए उद्योग क्षेत्र चिन्हित किए हैं और वह सभी सीमाई क्षेत्रों से सटे हुए एरिया हैं। बताते हैं कि वहां पर जमीन लेने को लेकर उद्योग विभाग भी सर्वे में जुटा हुआ है। वहां पर जमीन मिले और निवेश आए तभी राज्य सरकार को इसका लाभ मिलेगा। इस सर्वे के मुताबिक जमीन की तलाश करने को कहा गया है जिसपर अधिकारियों से रिपोर्ट भी मांगी गई है, परंतु लैंड बैंक में जो पहले से जमीन उद्योग विभाग के नाम पर पड़ी है उसका क्या किया जाएगा इसपर अभी तक कोई योजना नहीं बनाई गई है।
प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान का कहना है कि उद्योग विभाग के पास लैंड बैंक में जो जमीन पड़ी है उसको डेवलप करने के लिए पैसा चाहिए जिसकी डिमांड वह सरकार से कर रहे हैं। यह पैसा मिलता है तो जमीन को समतल करके उसे विकसित किया जाएगा ताकि वहां पर निवेशक आएं। फिलहाल इस लैंड बैंक का कोई प्रयोग नहीं हो पा रहा है, जिस पर एक विस्तृत योजना बनाने के लिए विभागीय अधिकारियों को कहा गया है।