शिमला। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने हाल ही में कैबिनेट मीटिंग में शिमला एमसी के मेयर का कार्यकाल 5 साल तक की अवधि के लिए बढ़ाने संबंधी फैसला लिया था। अब इस फैसले के खिलाफ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। एडवोकेट अंजलि सोनी वर्मा ने इस मामले में एक जनहित याचिका दाखिल की है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया की अगुवाई वाली खंडपीठ आज जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी। खंडपीठ में न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज भी होंगे। याचिका में हिमाचल सरकार के साथ राज्य चुनाव आयोग को भी पार्टी बनाया गया है। इसके अलावा राज्य सरकार के शहरी विकास विभाग, नगर निगम शिमला के कमिश्नर और मेयर सुरेंद्र चौहान भी मामले में पार्टी बनाये गए हैं।
उल्लेखनीय है कि सीएम सुक्खू की अध्यक्षता में 25 अक्टूबर को हुई कैबिनेट मीटिंग में शिमला शहर निगम के मेयर का कार्यकाल बढ़ाया गया था। दिलचस्प बात है कि मेयर का कार्यकाल बढ़ाने से कांग्रेस के पार्षद भी नाराज हैं। इस फैसले का कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के पार्षदों ने विरोध किया था। रोस्टर के अनुसार अब महिला पार्षद को मेयर बनना था, लेकिन सरकार ने कैबिनेट में कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय लिया।
पार्षदों के कहना है कि रोस्टर में छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भाजपा पार्षदों ने भी इस फैसले का जमकर विरोध करते हुए हाल ही में नगर निगम की बैठक में हंगामा किया था। सीएम सुक्खू ने कांग्रेस के सभी पार्षदों को सरकारी आवास ओक ओवर पर बुलाकर समन्वय स्थापित करने की भी कोशिश की थी।