धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आज तीसरा दिन है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र 26 नवंबर से 5 दिसंबर तक धर्मशाला के तपोवन में आयोजित है। इस सत्र कुल 8 बैठकें होंगी। 28 नवंबर और 4 दिसंबर को गैर-सरकारी सदस्य कार्य के लिए निर्धारित किया गया है। वहीं, शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन काफी हंगामे भरा रहा। भाजपा नेताओं ने पहले विधायक निधि को लेकर सदन के बाहर प्रदर्शन किया। उसके बाद सदन में पंचायत चुनावों को टालने को लेकर सरकार को जमकर घेरा। विधानसभा सत्र के दूसरे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। ऐसे में आज तीसरे दिन भी हंगामे के आसार हैं।
सड़कों पर उतरे पेंशनर्स, सुक्खू सरकार के खिलाफ की जमकर नारेबाजी
हिमाचल प्रदेश में पहली बार वरिष्ठ नागरिक (पेंशनर्स) सड़कों पर उतरे हैं। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान पेंशनरों ने आज प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पुलिस मैदान में सरकार के खिलाफ पेंशनरों ने जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी कर की। ‘पेंशन चोर गद्दी छोड़’, ‘लाड़ा-लाड़ी गद्दी छोड़’ और ‘सुखू भाई सुखू भाई, देदे हमारी पाई पाई’ जैसे नारों से धर्मशाला गूंज उठा।
सदन के बाहर कांग्रेस-बीजेपी विधायकों का प्रदर्शन
शुक्रवार को हिमाचल विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन एक अनोखा नजारा देखने को मिले। दरअसल इस सत्र के दौरान बीजेपी विधायक सरकार के खिलाफ अलग-अलग मुद्दों को लेकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करते आ रहे हैं। और बीजेपी पिछले कुछ सत्रों से ऐसा करती आ रही है लेकिन शुक्रवार को कांग्रेस विधायक भी उसी मोड में नजर आए। एक तरफ जहां बीजेपी नेताओं ने कर्मचारियों से जुड़े मामलों को लेकर सरकार को घेरा और कर्मचारी विरोधी सरकार के नारे लगाए और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों की तख्तियां पकड़े नजर आए तो दूसरी तरफ कांग्रेस विधायक साडा हक एथे रख के नारों के साथ प्रदर्शन करते दिखे। कांग्रेस विधायकों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ था। उन्होंने पीडीएएस की राशि ना मिलने से जुड़ी तख्तियां और बैनर पकड़े थे और केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे थे।
‘सदन में देर से पहुंचकर हंगामा कर रहे भाजपा विधायक’
बीजेपी विधायकों के प्रदर्शन और सदन में हंगामे को लेकर सत्ता पक्ष ने कहा कि बीजेपी विधायक दल विधानसभा के नियमों का पालन नहीं कर रहा है। सत्ता पक्ष का आरोप है कि ‘नेता विपक्ष जयराम ठाकुर प्रश्नकाल में देरी से पहुंचे और किसी मुद्दे पर बोलने के लिए अड़े रहे, जबकि सदन में पहुंचने से पहले उनके तीन प्रश्न लग चुके थे। भाजपा विधायक सदन में नारेबाजी करके प्रश्नकाल को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। स्पीकर कुलदीप पठानिया ने प्रश्नकाल के बाद नेता विपक्ष जयराम ठाकुर को बोलने के लिए समय देने का आश्वासन दिया लेकिन इसके बावजूद भी भाजपा विधायक नारेबाजी कर रहे हैं। ‘
कांग्रेस विधायकों का सदन के बाहर प्रदर्शन
हिमाचल विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान आज कांग्रेस विधायकों ने भी सदन के बाहर प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने केंद्र सरकार से पीडीएएस की राशि ना मिलने पर प्रदर्शन की और साडा हक एथे रख के नारे भी लगाए। इस दौरान कांग्रेस विधायकों के हाथ में पीडीएएस की राशि ना मिलने से जुड़े नारे लिखी तख्तियां भी थीं। इससे पहले बीजेपी भी लगातार राज्य सरकार के खिलाफ शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही सदन के बाहर इस तरह का प्रदर्शन कर रही है।
हिमाचल प्रदेश के शीतकालीन सत्र के दौरान पेंशनर्स द्वारा किया गया यह व्यापक प्रदर्शन एक बार फिर यह साबित करता है कि राज्य में पेंशन से जुड़े सवाल भावनाओं, अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा से गहराई से जुड़े हैं। पुरानी पेंशन बहाली और पेंशन से संबंधित नीतियों पर सरकार के कदमों को लेकर बढ़ती नाराज़गी अब खुलकर सड़कों पर दिखाई दे रही है।
सुक्खू सरकार के लिए यह सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि जनमानस का सीधा संदेश है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी खुद को असुरक्षित और अनसुना महसूस कर रहे हैं। पेंशनर्स का यह हल्ला-बोल बताता है कि सरकार को जल्द, स्पष्ट और भरोसेमंद समाधान पेश करना होगा। यदि सरकार संवाद और निर्णय में देरी करती है, तो यह असंतोष आने वाले समय में एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में भी उभर सकता है।
इसलिए अब यह समय है कि सरकार पेंशनर्स की मांगों को गंभीरता से सुने, प्रशासनिक जटिलताओं को सरल करे और ऐसा ठोस रोडमैप पेश करे जो पेंशनर्स को न सिर्फ राहत दे, बल्कि सरकार के प्रति उनका भरोसा भी मजबूत करे। हिमाचल जैसे शांत और संवेदनशील राज्य में जनता की आवाज को नजरअंदाज करना किसी भी सरकार के लिए जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है।