शिमला। हिमाचल प्रदेश इस वर्ष मौसम के अप्रत्याशित बदलावों से जूझ रहा है। बरसात के मौसम में भारी वर्षा और भूस्खलन का सामना करने के बाद अब प्रदेश सूखे की गंभीर स्थिति से गुजर रहा है। नवंबर का पूरा महीना लगभग बारिश-विहीन रहा, जिससे हालात चिंताजनक हो गए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार इस नवंबर में प्रदेश में सामान्य से 95 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। आमतौर पर जहां इस अवधि में 19.7 मिमी बारिश होती है, वहीं इस बार मात्र 1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। सिरमौर जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां पूरे माह बारिश की एक भी बूंद नहीं गिरी। चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सोलन में भी वर्षा में 99 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई।
सूखे के कारण दिन के तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट आई है, जबकि कई इलाकों में रातें बर्फीली ठंड जैसी महसूस होने लगी हैं। लाहौल–स्पीति में स्थिति इतनी ठंडी है कि नदी-नालों का पानी जमने लगा है।
खेती-बाड़ी पर असर
लगातार सूखे का सबसे बड़ा प्रभाव कृषि पर पड़ा है। खेतों में नमी की कमी के कारण रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं की बुवाई प्रभावित हुई है। कृषि विभाग के अनुसार अब तक केवल 75 प्रतिशत बुवाई ही हो पाई है। कई किसान नमी न होने के चलते गेहूं छोड़कर जौ, सरसों और चारे वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
सेब बागवानी संकट की ओर
बागवानी भी इस मौसम की मार से अछूती नहीं रही। बागवानों का कहना है कि लगातार सूखे मौसम का असर सेब के पेड़ों के चिलिंग ऑवर्स पर पड़ा है। यदि दिसंबर में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो अगले वर्ष सेब उत्पादन में गिरावट की आशंका है।
शिमला, रोहड़ू, रामपुर और कोटखाई सहित ऊपरी शिमला क्षेत्र पर इसका सबसे अधिक प्रभाव बताया जा रहा है।
कोहरे का अलर्ट
मंडी, बिलासपुर और कांगड़ा सहित कई जिलों में सुबह और शाम को घना कोहरा छाया रहा, जिससे तापमान और नीचे गिर गया है। मौसम विभाग ने कांगड़ा, ऊना, मंडी, बिलासपुर और हमीरपुर जिलों के लिए कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है।
आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद
मौसम विभाग के मुताबिक 4 और 5 दिसंबर को पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है। इस दौरान ऊपरी क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी और मध्य पर्वतीय इलाकों में बारिश हो सकती है। यदि वर्षा समय पर होती है, तो इससे गेहूं की बुवाई और सेब बागवानी को राहत मिलने की उम्मीद है।