शिमला। आज पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की 81वीं जयंती है। 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 24 घंटे के भीतर देश के प्रधानमंत्री बन गए थे। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने साल 1984 से 1989 के बीच देश का नेतृत्व किया। वे राजीव गांधी ही थे, जिन्होंने भारत के लोगों को 21वीं सदी का सपना दिखाया था। 21 मई 1991 में लिट्टे के आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की मौत हुई थी। आज राजीव की पुण्यतिथि को देश आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में भी मनाई जा रही है। प्रधानमंत्री रहते हुए स्व. गांधी ने कई ऐसे काम किए, जिन्होंने देश की दिशा बदल दी। सिर्फ पांच साल के एक कार्यकाल में राजीव ने पीएम के रूप में इनोवेशन पर जोर दिया।
एविएशन के प्रति गहरा लगाव
राजीव गांधी ने इंग्लैंड के कैम्ब्रिज से पढ़ाई अधूरी छोड़ने के बाद दिल्ली में कमर्शियल पायलट की ट्रेनिंग ली और इंडियन एयरलाइंस में बतौर पायलट 5000 मासिक वेतन पर नौकरी शुरू की थी। यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि वे फ्लाइट शेड्यूल के समय इतने अनुशासित रहते थे कि उन्हें पहचानने वाले अधिकारी भी अक्सर भूल जाते थे कि यह प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बेटा है। आज उनकी जयंती पर हम उनके द्वारा देश के हित में लिए गए कुछ बड़े फैसलों को लेकर बात करेंगे।
कंप्यूटर शिक्षा की शुरुआत…
राजीव गांधी के प्रयासों से ही शिक्षण संस्थानों में कंप्यूटर शिक्षा की शुरुआत हुई, डेस्कटॉप से शुरू हुआ सफर लैपटॉप तक पहुंच गया। उनके प्रयासों के बाद ही विश्वविद्यालयों व तकनीकी संस्थानों में कंप्यूटर शिक्षा, प्रोग्रामिंग लैब, और डेटा प्रोसेसिंग पाठ्यक्रमों को बढ़ावा मिला, जिससे बाद में आईटी सेवाओं के निर्यात का मजबूत आधार बना और आज भी भारत इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका अदा कर रहा है। तकनीक की इस तरक्की का असर बैंक, बीमा कंपनियों, डाकघर से लेकर हर सरकारी दफ्तर में किसी न किसी रूप में हम सब देख रहे हैं। देश की 2 बड़ी टेलीकॉम कंपनी एमटीएनएल और वीएसएनएल की शुरुआत उनके कार्यकाल में ही हुई।
सूचना और मीडिया में आधुनिक दृष्टिकोण…
पीएम के रूप में राजीव ने जो तकनीकी विकास की यात्रा का संकल्प लिया, उसी का असर था कि देश में निजी टेलीविजन भी बड़े पैमाने पर आए। सैटेलाइट-आधारित संचार और जनसंचार के नए माध्यमों के प्रति सकारात्मक रुख ने शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा-सूचना जैसे क्षेत्रों में जनहित संचार को सुदृढ़ किया।
युवाओं को मताधिकार…
आज जब एक युवा 18 साल का होता है और वोट डालने के बाद अंगुली की स्याही दिखाते हुए सेल्फी लेता है तो उसका उत्साह देखते ही बनता है, लेकिन इनमें से कई को यह भी पता नहीं होगा कि 18 साल की उम्र में वोट देने का अधिकार आखिर उन्हें कैसे मिला? दरअसल, वे राजीव गांधी ही थे, जिन्होंने वोटिंग की उम्र 21 साल से घटाकर 18 वर्ष की थी। कहा जाता है कि जिस समय यह फैसला लिया गया था, उस समय करीब 5 करोड़ युवाओं को वोट देने का अधिकार मिला था।
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा…
स्व. राजीव गांधी ने ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के उद्देश्य से जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना की। वर्तमान में लगभग हर जिले में एक नवोदय विद्यालय है और स्थिति ऐसी है कि शहरी क्षेत्र के बच्चे भी नवोदय स्कूलों में प्रवेश ले रहे हैं। राजीव ने यह फैसला 1986 में घोषित शिक्षा नीति के तहत लिया था।
पंचायती राज…
गांवों को सशक्त और लोकतंत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए राजीव ने पंचायती राज का बड़ा फैसला लिया। इसके माध्यम से उन्होंने पूरे देश में ग्राम सरकार की अवधारणा लागू की और पंचायतों को ज्यादा अधिकार दिए। उनका मानना था कि ग्राम पंचायतों को सत्ता में वह दर्जा मिलना चाहिए जो संसद और विधानसभा का है।
अयोध्या विवाद पर बड़ा फैसला…
ऐसा कहा जाता है कि हिन्दू समुदाय की नाराजी को कम करने के लिए वर्ष 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अयोध्या के विवादित स्थल का ताला खुलवा दिया और 1989 में राम मंदिर के निर्माण के लिए शिलान्यास की इजाजत भी दे दी। तब से यह मामला राजनीतिक बन गया। वर्तमान में राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। सबसे पहले अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग 1885 में महंत रघुवर दास ने उठाई थी।