हरनेड़ गांव के किसान दंपत्ति से प्रेरित हो रहे किसान, प्राकृतिक खेती से बढ़ी आय
हमीरपुर। प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में हमीरपुर जिला लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। इसी कड़ी में निकटवर्ती गांव हरनेड़ के एक बुजुर्ग किसान दंपत्ति ने अपनी मेहनत और नवाचार से एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। मात्र दो मरले भूमि पर प्राकृतिक विधि से आलू की खेती कर लगभग 200 किलोग्राम उत्पादन हासिल कर उन्होंने कृषि विशेषज्ञों को भी चकित कर दिया है।
विकास खंड बमसन के गांव हरनेड़ निवासी 76 वर्षीय तीर्थू देवी और उनके 83 वर्षीय पति रिखी राम शर्मा पहले अपनी लगभग 15 कनाल भूमि पर पारंपरिक तरीके से गेहूं और मक्की की खेती करते थे। हालांकि, इस खेती से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था और रासायनिक खाद व हाईब्रिड बीजों पर खर्च भी अधिक था। करीब ढाई वर्ष पूर्व तीर्थू देवी को प्रदेश सरकार की ‘राजीव गांधी प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान योजना के बारे में जानकारी मिली। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाई।

कई फसलों की खेती कर रहे प्राकृतिक तरीके से
अब उनका परिवार गेहूं और मक्की के साथ-साथ अरबी, हल्दी, धनिया, मैथी, सरसों, सोयाबीन, भिंडी सहित कई अन्य फसलों की खेती पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से कर रहा है। पिछले सीजन में उन्होंने केवल दो मरले भूमि में आलू की खेती की, जिससे लगभग 200 किलोग्राम उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उपज को स्थानीय बाजार में 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से तुरंत बिक्री मिल गई, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। तीर्थू देवी और उनके पति की इस सफलता ने गांव के अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
राजीव गांधी प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान योजना के तहत जिले के लगभग 25 हजार किसानों को इस पद्धति से जोड़ा जा चुका है। करीब 3000 हेक्टेयर भूमि प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाई गई है तथा किसानों को अब तक 1 करोड़ 68 लाख रुपये की सबसिडी प्रदान की जा चुकी है।-राकेश धीमान, निदेशक, आतमा परियोजना हमीरपुर।







