कुल्लू: जिला कूल्लू के उपमंडल आनी व निरमंड के लोगों को अब साल भर जिला मुख्यालय से जुड़े रहने में आसानी होगी, क्योंकि अब केंद्र सरकार ने जलोड़ी जोत के नीचे से टनल बनाने की प्रक्रिया में कार्य शुरू कर दिया है। ऐसे में अब साल भर आनी और बंजार के बीच टनल बनने से लोगों की आवाजाही जारी रहेगी और दो दर्जन से अधिक पंचायत के लोगों को वाया शिमला या फिर वाया करसोग होकर 100 किलोमीटर से अधिक अतिरिक्त सफर नहीं करना होगा। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अब प्रशासन की टीम जलोड़ी जोत टनल की एलाइनमेंट के लिए भी सर्वे करेगी और उसके बाद एफसीए के लिए भी आवेदन किया जाएगा।
टनल निर्माण की एलाइनमेंट और एफसीए आवेदन को लेकर अलग-अलग विभागों, प्रशासन और कंपनी की संयुक्त टीम का निरीक्षण करेंगे। हालांकि जलोड़ी टनल निर्माण की एलाइनमेंट तय की जा चुकी है, लेकिन इसके फील्ड वेरीफिकेशन के लिए निर्माता अल्टीनौक कंसलटिंग इंजिनियरिंग, नेशनल हाईवे के साथ-साथ लोक निर्माण, वन, जल शक्ति विभाग, बिजली बोर्ड और प्रशासनिक अधिकारी संयुक्त रूप से निरीक्षण करेंगे। इस निरीक्षण के माध्यम से फील्ड वेरीफिकेशन होगी और एफसीए मंजूरी के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।
जलोड़ी टनल प्रोजेक्ट के लिए केंद्र से 1452 करोड़ रुपये मंजूर हो चुके हैं। इससे टनल निर्माण का रास्ता साफ हो रहा है। यह टनल एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, हमने केंद्र के साथ राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश के मसलों को उठाया है। – विक्रमादित्य सिंह लोक निर्माण विभाग मंत्री।
टनल की फाइनल अलाइनमेंट को केंद्र की मंजूरी
बीते दिनों ही केंद्रीय मंत्रालय इस टनल की फाइनल अलाइनमेंट को मंजूरी दे चुका है। मंत्रालय के अनुसार आनी उपमंडल के भरगोल से बंजार उपमंडल के सोझा तक बनने वाली इस टनल की लंबाई 4.2 किलोमीटर होगी। इसके लिए आनी की ओर से टनल के मुहाने तक दो किलोमीटर (2,124 मीटर) और बंजार से 5.5 किलोमीटर (5,476 मीटर) अप्रोच रोड बनाया जाएगा। जलोड़ी जोत टनल बन जाने के बाद आनी से कुल्लू की दूरी भी आठ किलोमीटर कम हो जाएगी।
डबल लेन होगी टनल
जलोड़ी जोत के नीचे बनने वाली यह टनल डबल लेन होगी। वहीं, इस टनल में पानी, बिजली व टेलीफोन लाइन डालने के भी व्यवस्था होगी। टनल बनने के बाद बंजार, लुहरी सैंज सड़क मार्ग पर साल भर वाहनों की आवाजाही होगी। इससे लोगों के समय के साथ-साथ पैसों की भी बचत होगी। वहीं, टनल बनने से लाहौल स्पीति, कुल्लू, मंडी, शिमला व किन्नौर के लाखों लोग इससे लाभान्वित होंगे। इस टनल के बनने से वाया बंजार होते हुए शिमला से मनाली की दूरी भी 40 से 45 किलोमीटर कम हो जाएगी।
12 महीने सुचारू रहेगी आवाजाही
गौर रहे कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर सर्दी और बरसात में सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना जलोड़ी दर्रे के कारण लोगों को करना पड़ता है। भारी बर्फबारी के चलते जलोड़ी दर्रा वाहनों की आवाजाही के लिए बंद हो जाता है। ऐसे में लोगों को मंडी जिले के करसोग से होकर कुल्लू आना जाना पड़ता है। शिमला जिले के लुहरी से कुल्लू की दूरी 120 किलोमीटर है। जलोड़ी दर्रा बंद होने से कुल्लू की दूरी 220 किलोमीटर हो जाती है। जिस कारण लोगों को आर्थिक रूप से भी नुकसान उठाना पड़ता है। टनल के बन जाने से 12 महीने जलोड़ी पास आवाजाही हो पाएगी।
2019 में हुआ था सर्वे
जलोड़ी दर्रा में टनल के लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने वायु सेना की मदद से जियोलॉजिकल सर्वेक्षण एमआई 17 हेलीकॉप्टर के माध्यम से करवाया था। 19 दिसंबर 2019 को ये सर्वे किया गया था। इसमें जलोड़ी दर्रे में टनल के निर्माण को लेकर अंदर पत्थर व पानी का पता लगाया गया है। बंजार के उपमंडलाधिकारी पंकज शर्मा ने बताया कि ‘संबंधित विभागों को पत्राचार के माध्यम से जलोड़ी टनल निर्माण के संयुक्त निरीक्षण करने संबंधित पत्राचार किया गया है ताकि सभी विभागों के अधिकारी इस निरीक्षण प्रक्रिया को पूरी कर सकें।







